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मरती जनता आम, जीवन हुआ हराम,
रुक गए सभी काम, युद्ध होना चाहिए ?
युद्ध से अवरुद्ध है, मानस जन क्रुद्ध है,
रुका हुआ विकास है, बंद युद्ध चाहिए।
धरा से गगन तक, सुबह से शाम तक,
गरज रहीं तोपक, रोक होना चाहिए।
नेता सब बैठकर, बात करें सोचकर,
कोई हल निकालकर, बात होना चाहिए।
****कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 🌹*****
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