अंशुल राज के बप्पा
🌷अंशुल राज के बप्पा 🌷
**00**
कित्ते सावन गेड़ी कूदी,डाड़े मुठ्ठें ठोंकी।
खूब उछंगा डंडा कूदे, मूंछें खूब उमेंठी।
हार न मानी एकऊ, खूब लगाये लप्पा।१।
आज रिटायर हो रहे हैं,अंशुल राज के बप्पा...२
बरसाती चिंगारी छोड़ी, ढाला खूब नचाई।
बने अहीर फिरत रहे,करलई खूब मिताई।
शान से इनने करी नौकरी, नहीं डरायो पट्ठा।२।
आज रिटायर हो रहे हैं,अंशुल राज के बप्पा...२
होरी के हुरियारे फीके, रंग लगायो चोखा।
मारी टंगड़ी शूरों की, दओ न काहू मौका।
आलराउंडर रहे मेंच में, खूब लगाओ ठप्पा।।३।
आज रिटायर हो रहे हैं,अंशुल राज के बप्पा...२
चौदह बरस रहा हूं मैं,संगत बड़ी अनोखी।
खूब बढ़ाओ खूब सिखाओ, नहीं भिन्नता देखी।
बासठ में सठियाने नईहां, बहुत लगायें ठट्ठा।४।
आज रिटायर हो रहे हैं,अंशुल राज के बप्पा...२
***00***
कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी
नर्मदापुरम्
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें