रविवार, 1 मार्च 2026

अंतिम डेट निकलने का डर

अंतिम डेट निकलने का डर
************************************
जब जब होय चुनाव देश में,मंहगाई बढ़ जाती है।
तब तब होय महा घोटाले, मंहगाई बढ़ जाती है।

जब जब चंदा लेवें नेता, सरकारें बन जाती हैं।
जब जब पलट होय सत्ता में,नव नव विधियां लाती हैं।

मंहगाई बढ़ती जाती है, राशन की बेदामी से।
मंहगाई बढ़ती जाती है, बढ़ती जन आवादी से।

मंहगाई बढ़ती जाती है, आतंकों के हमलों से।
मंहगाई बढ़ती जाती है, प्रकृति के कमालों से । 

हो रही अब जनता आलसी, अधिकोष कर्ज माफी से, 
काम करे ना कोई धंधा, चलता खर्च उधारी से।

मंहगाई बढ़ती जाती है, उत्पादन कमजोरी से।
मंहगाई बढ़ती जाती है,माल की जमाखोरी से।

मंहगाई बढ़ती जाती है,निरंकुश शासन नीति से।
मंहगाई को है रोकना, नियम लगाओ शक्ति से।

नोटों पर हो “एक्सपायरी”,अंतिम डेट निकलने का।
चलता फिरता रहे देश में, ना डर उसे छिपाने का।
*********कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी***********

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अंतिम डेट निकलने का डर

अंतिम डेट निकलने का डर ************************************ जब जब होय चुनाव देश में,मंहगाई बढ़ जाती है। तब तब होय महा घोटाले, मंहगाई बढ़ जात...