आपकी धर्म पत्नी

 धर्म पत्नी,
     मैंने लोगों के मुख से बोलते हुए सुना है अपनी पत्नी को धर्म पत्नी कहते हुए। मुझे इस शब्द में कुछ गड़बड़ लग रहा था। जब मेरा विवाह हुआ तो इस शब्द पर विचार किया। कुछ मंथन किया, बहिन होती है,भाई होता है, मां होती है आदि। धर्म बहिन, धर्म भाई, धर्म पिता, धर्म मां। तो क्या धर्म पत्नी भी होती है ?
      हम बहिन को बहिन कहते हैं जिसने उस मां से जन्म लिया जिससे हमने लिया है।हम उस महिला को भी बहन, मां कहते हैं जिसे जानते-पहचानते भी नहीं। हमारी जितने प्रकार की बहिनें होती हैं उतने ही प्रकार के भाई। 
       जैसे भाई,बहन,बुआ एक ही होते हैं उसी तरह पत्नी भी एक ही होती है, सिर्फ पत्नी।
      हम अजनबी या पहचान बाले को भाई, बहन, मां,बुआ का दर्जा उसके सम्मान के लिए देते हैं, मर्यादा के लिए देते हैं। अगर कोई किसी महिला के लिए कहे कि वह तो मेरी धर्मपत्नी है तो…….. क्या होगा?
     हां आप किसी अनजान महिला के लिए बुआ, मां,कह रहे हैं तो कुछ बात नहीं। कोई भी महिला किसी भी पुरुष से भाई, मामा,काका,कह दे तो….. और किसी अन्य पुरुष को धर्म पति कहे तो….. क्या होगा?
    मैं आजकल बहुत से लोगों के मुख से सुनता हूं वे अपनी पत्नी को धर्म पत्नी कहते हैं। क्या वास्तव में वह धर्म पत्नी है। नहीं। वह धर्म पत्नी नहीं है वह तो सिर्फ पत्नी है। जो हमें पंद्रहवें संस्कार से प्राप्त होती है और उसे पति।
    हमारे धर्म में एक साथ शिक्षा लेने वाले गुरु भाई, गुरू बहिन कहलाते हैं। साथ-साथ चलने वाले पंथ भाई बहन कहलाते हैं। परन्तु साथ-साथ चलने वाली महिला पंथ पत्नी नहीं कहलाती। 
    नंद बाबा कृष्ण के धर्म पिता, यशोदा धर्म माता थीं असली पिता वसुदेव देवकी वहीं कुंती श्री कृष्ण की बुआ थीं और द्रोपदी कृष्ण की धर्म बहिन,देवी सुभद्रा धर्म बहिन,बलदाऊ धर्म भाई। पांडव में नकुल-सहदेव भाई थे एक ही मां और पिता से,जबकि अन्य भाईयों के पिता अलग-अलग और मां एक थीं। ये धर्म भाई थे। दूध भाई भी होते हैं जिसने जन्म किसी और मां से लिया और दूध किसी और महिला का पिया हो, तो उसका बेटा और दूध पीने वाला आपस में दूध भाई, बहन होते हैं।
      पत्नी सिर्फ पत्नी होती है। किसी महिला को धर्म पत्नी कहना या मानना गलत है और उस महिला को अपनी पत्नी जैसा अधिकार देना है। इस संबंध को नाजायज माना जाएगा। उस महिला को उस पुरुष की रखैल या उपपत्नी कहा जायेगा, पत्नी नहीं। यही पुरुष के लिए। अगर कोई पुरुष पहली पत्नी के बाद दूसरा या उससे अधिक विवाह करता है तो वे सब उपपत्नी कहलायेंगी।
      पटरानी, जब बहु विवाह की प्रथा थी तब एक पुरुष की अनेक पत्नियां हुआ करती थीं। जो प्रथम पत्नी होती थी और सभी गुणों से संपन्न हुआ करती थी उसे पटरानी की उपाधि दी जाती थी। किंतु आज एक ही पत्नी होती है।
       हमें विचार करना चाहिए कि धर्म भाई, धर्म बहिन, धर्म पिता, धर्म मां तो हो सकते हैं परन्तु धर्म पत्नी नहीं। इस शब्द की व्याख्या में कुछ विद्वान कहते हैं कि धर्म पत्नी वह होती है जो पति को धर्म के मार्ग पर चलाये जो पति के साथ धार्मिक कार्यों में साथ निभाती हैं तो क्या पत्नी धार्मिक कार्यों में साथ नहीं देती? क्या पत्नी सामाजिक स्वीकृति से सिर्फ संतान पैदा करने के लिए है, अन्य धार्मिक, सामाजिक, कार्यों के लिए नहीं? धर्म पत्नी शब्द कहां से आया मुझे नहीं पता किंतु इतना जरूर कहूंगा धर्म पत्नी कोई संबंध नहीं है। 
    मुझे एक घटना याद आ गई। कुछ बच्चियां खेल रहीं थीं। अपनी धुन में। एक बच्ची बोली हम रानी बनेंगे और तुम सब नौकरानी। उनमें बहस हो गई। तब एक लड़की बोली हां हम नौकरानी हैं हमारे नीचे तो नौ रानियां काम करेंगी।
    ऐसा ही यह शब्द है धर्म पत्नी जो धर्म का काम करें। तो किसी महिला को धर्म बहिन कहते हो कभी धर्म पत्नी भी कह कर देखो !

👉मेरा यह लेख एक आत्मा, एक वर्ग अवश्य पढ़ें 🙏 

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