मेरे द्वारे फागुन आया, लेकर रंग कमाल।
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मेरे द्वारे फागुन आया, लेकर रंग कमाल।
गीत फागुनी नाचें-गायें, उड़ती खूब गुलाल....
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मेरे द्वारे फागुन आया, लेकर रंग कमाल।
गीत फागुनी नाचें-गायें, उड़ती खूब गुलाल....
देख सामने रूप मनोहर, मन में भरी उमंग।
सुध-बुध मैं तो भूल गई थी, जैसे डसा भुजंग।।
सिरहन दौड़ गई तन-मन में, पकड़ लगाया अंग।
सारे अंग रंग से भीगे, चुनरी कर दी लाल........
गीत फागुनी नाचें-गायें, उड़ती खूब गुलाल......1
सुध-बुध मैं तो भूल गई थी, जैसे डसा भुजंग।।
सिरहन दौड़ गई तन-मन में, पकड़ लगाया अंग।
सारे अंग रंग से भीगे, चुनरी कर दी लाल........
गीत फागुनी नाचें-गायें, उड़ती खूब गुलाल......1
हंसी ठिठोली सखियां करती, गाती फागुन गीत।
नाम पिया का ले लेकर, खूब जताई प्रीत।।
भर पिचकारी पीछे दौड़े, मेरे मन का मीत ।
छलिया करता जोरा-जोरी, रंग लगाए गाल.....
गीत फागुनी नाचें-गायें, उड़ती खूब गुलाल...,2
नाम पिया का ले लेकर, खूब जताई प्रीत।।
भर पिचकारी पीछे दौड़े, मेरे मन का मीत ।
छलिया करता जोरा-जोरी, रंग लगाए गाल.....
गीत फागुनी नाचें-गायें, उड़ती खूब गुलाल...,2
पिया हमारे छैल-छबीले, मन में उनके खोट।
नजर नशीली तन में चुभती, कर ना पाई ओट।।
गले लगाकर चिंउटी काटी, खिसकी चोली गोट।
मैं तो मति की इतनी भोरी, समझ न पाई चाल....
गीत फागुनी नाचें-गायें, उड़ती खूब गुलाल.....,3
मेरे द्वारे फागुन आया, लेकर रंग कमाल......
*******कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 🌹*******
नजर नशीली तन में चुभती, कर ना पाई ओट।।
गले लगाकर चिंउटी काटी, खिसकी चोली गोट।
मैं तो मति की इतनी भोरी, समझ न पाई चाल....
गीत फागुनी नाचें-गायें, उड़ती खूब गुलाल.....,3
मेरे द्वारे फागुन आया, लेकर रंग कमाल......
*******कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 🌹*******
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