रविवार, 1 मार्च 2026

मेरे द्वारे फागुन आया लेकर रंग कमाल

 मेरे द्वारे फागुन आया, लेकर रंग कमाल।
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मेरे   द्वारे  फागुन  आया,   लेकर   रंग    कमाल।
गीत  फागुनी  नाचें-गायें,   उड़ती   खूब  गुलाल....

देख   सामने  रूप  मनोहर,  मन   में  भरी  उमंग।
सुध-बुध  मैं  तो  भूल  गई  थी,  जैसे डसा भुजंग।।
सिरहन  दौड़  गई तन-मन में, पकड़  लगाया अंग।
सारे  अंग  रंग  से भीगे, चुनरी  कर  दी  लाल........
गीत  फागुनी  नाचें-गायें,  उड़ती  खूब  गुलाल......1

हंसी  ठिठोली  सखियां करती, गाती फागुन  गीत।
नाम  पिया  का   ले लेकर,  खूब    जताई   प्रीत।।
भर  पिचकारी   पीछे   दौड़े,  मेरे मन   का   मीत ।
छलिया   करता   जोरा-जोरी,   रंग लगाए  गाल.....
गीत   फागुनी   नाचें-गायें, उड़ती  खूब   गुलाल...,2

पिया    हमारे   छैल-छबीले,   मन में उनके  खोट।
नजर   नशीली  तन  में चुभती,  कर ना पाई ओट।।
गले   लगाकर चिंउटी   काटी, खिसकी चोली  गोट।
मैं तो  मति की  इतनी भोरी,  समझ न पाई चाल....
गीत फागुनी  नाचें-गायें, उड़ती   खूब   गुलाल.....,3
मेरे    द्वारे   फागुन  आया, लेकर   रंग   कमाल......
*******कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 🌹*******




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