विषय भोग की कक्षा सस्ती,गलियन लगी दुकान


 महॅंगा हर सामान 
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विषय भोग की कक्षा सस्ती,गलियन लगी दुकान,
सस्ती  बिके  यहां  पर  निष्ठा, महॅंगा  हर  सामान……
लिप्सा  में   लिपटा  है  मानव,  बनकर  बेईमान।
सस्ती  है  नारी  की  इज्जत, सस्ता  है अपमान ।।
मात-पिता  की  लाज डुबाते, समझ  रहे सम्मान।
खून  यहां  पर सस्ता  मिलता, महॅंगा  हर  सामान...1
निकलें जब जब घर से लड़की, रस्ता हो सुनसान।
दिन  भर चिंता  रहे  बाप  को, रहे  आस भगवान।।
पता  नहीं  किस दर  से निकले,छुपा हुआ शैतान।
मात्र  आबरू  सस्ती दिखती, महॅंगा  हर  सामान…2
तरुणाई  उद्दंड   हुई   है,  नहीं  लाज  का   भान।
नहीं  बची  नारी  में  ममता,  नहीं  पुरुष  में  ज्ञान।।
नुक्कड़  नुक्कड़  बैठ  भेड़िए,  करें   रोज  हैरान।
सस्ता  है  मदिरा  लय  जाना, महॅंगा  हर  सामान...3
लाज   देश  की  धूमिल करके, बन बैठे यजमान।
फिर भी उनकी भूख मिटे ना, करें  छली फरमान।।
मंच   मंच   पर   होते  रहते,  सुंदर  सुंदर    गान।
सस्ते  हैं  मजदूर  यहां  पर,  महॅंगा  हर सामान…..4
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          कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 🌹 


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