सामूहिक सम्मान


        सामूहिक काम में सहयोग सभी का होता है। किसान का छोटा सा बेटा पिता को खेत में पानी देने जाता है तो कृषि में काम करने बालों में उसका योगदान होता है। उसका नाम भी शामिल होना चाहिए।
      टीम के सभी सदस्यों से मिलकर जीत-हार होती है, इसमें किसी कम या ज्यादा योगदान का आधार नहीं होना चाहिए। 

      कौन कितना अच्छा खेला, कौन नहीं खेला ?
अगर जीत मिली तो सबके प्रयास से। हार मिली तो सभी के आलस्य से। 

      कोई अच्छा खेला,ठीक है, कोई बुरा खेला तो भी उसने कुछ ना कुछ तो योगदान दिया होगा। अगर आपकी टीम दो पाइंट से जीतती है और किसी एक खिलाड़ी ने सबसे कम दो ही पाइंट बनाए हैं तो क्या उसने कोई योगदान नहीं किया ? क्या आप उसके दो नंबरों के बिना खेल जीत सकते हो ? 
    थोड़ा-थोड़ा करके ही बड़ा बनता है। बूंद-बूंद से घड़ा भरता है। 

       मेरा मतलब यह कि टीम के सभी सदस्यों को समान सम्मान मिलना चाहिए। किसी का मुंह देखकर या खेल देखकर नहीं। अभी कुछ खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया जा रहा है, किसी को भारी मात्रा में धनराशि दी जा रही है और को दूर से इस कृत्य को देख रहा है। जबकि वह भी तन,मन, से साथ खेला था। सम्मान न मिलने से उसके मन में हीनभावना पैदा हो सकती है, सिर्फ कोई हवा देकर चिंगारी से शोला बना सकता है। सम्मान दो तो सामूहिक, खेल भी सामूहिक था। सम्मान कौन नहीं चाहता, देवता भी चाहते हैं कि कोई हमारी आरती उतारे। मनुष्य भी चाहता है। 
      अगर यही सम्मान उसे जब विपक्ष देता है तो वह सहर्ष स्वीकार कर लेता है, तब हम उसे गद्दार कहते हैं कभी आपने सोचा था कि यह भी हमारे साथ खेला और इसको भी हमारी आरती में शामिल किया जाना चाहिए था। 

       सभी दौलत के पीछे नहीं दौड़ते, हां शोहरत के पीछे सभी दौड़ते हैं।

 हनुमत वीरा 👈 कृपया इन दोहों को अवश्य पढ़ें 🙏 


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