हनुमत वीरा
जय हो तुलसी दास
•••••
(1)
जय हो तुलसी दास की,राम नाम के साथ।
हनुमत वीरा संग में, लिए पताका हाथ।।
लिए पताका हाथ, राम का पता बताए।
चित्रकूट के धाम, राम की कथा सुनाए।।
रचा काव्य महान, कहाये बड़े मनीषी।
कविवर गाते नाम, पुकारें जय हो तुलसी।।
(2)
रोटी रूठी दीन से, हुआ भ्रष्ट जब तंत्र।
काम सभी होने लगे,चलें लोह के यंत्र।।
चलें लोह के यंत्र, सौ का एक संभाले।
छोटे छोटे काम, श्रमिक किये हवाले।।
होता बीच दलाल, रकम उगाहते मोटी।
बहा पसीना खूब, मिले नहिं पूरी रोटी
(3)
रोटी रूठी दीन से, गुनहगार है कौन ?
पाते राशन मुफ्त का, बैठे रहते मौन।।
बैठे रहते मौन, सुहाती नहीं मजूरी।
आलस से लाचार, अब होती नहिं हजूरी।।
करते हैं जब काम, रकम हो कोई मोटी।
कर्ज, माफ, बेदाम, फिर क्यों कमाएं रोटी ?
***
कुंडलियां:कमलेश नागवंशी बनखेड़ी
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(1)
जय हो तुलसी दास की,राम नाम के साथ।
हनुमत वीरा संग में, लिए पताका हाथ।।
लिए पताका हाथ, राम का पता बताए।
चित्रकूट के धाम, राम की कथा सुनाए।।
रचा काव्य महान, कहाये बड़े मनीषी।
कविवर गाते नाम, पुकारें जय हो तुलसी।।
(2)
रोटी रूठी दीन से, हुआ भ्रष्ट जब तंत्र।
काम सभी होने लगे,चलें लोह के यंत्र।।
चलें लोह के यंत्र, सौ का एक संभाले।
छोटे छोटे काम, श्रमिक किये हवाले।।
होता बीच दलाल, रकम उगाहते मोटी।
बहा पसीना खूब, मिले नहिं पूरी रोटी
(3)
रोटी रूठी दीन से, गुनहगार है कौन ?
पाते राशन मुफ्त का, बैठे रहते मौन।।
बैठे रहते मौन, सुहाती नहीं मजूरी।
आलस से लाचार, अब होती नहिं हजूरी।।
करते हैं जब काम, रकम हो कोई मोटी।
कर्ज, माफ, बेदाम, फिर क्यों कमाएं रोटी ?
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कुंडलियां:कमलेश नागवंशी बनखेड़ी
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