चले लोह के यंत्र
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रोजगार गायब सभी, चले लोह के यंत्र।
कारण और अनेक हैं, हुआ भ्रष्ट अब तंत्र।।१
काले-काले काम भी, दिन में करते आज।
लोग हुए बेकार अब, बेंच दिये है लाज।।२
रिश्वत में शिक्षा बिके, बिके हुए हुक्काम।
बिना दलाली मिले नहिं, मजदूरी का दाम।।३
आया समय मशीन का, बदला श्रम किरदार।
रोजगार गायब सभी, लोग हुए बेकार।।४
ए आई की धूम है, आन लगावें धान।
भूख मिटाये पेट की, नहीं वेदना ज्ञान।।५
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कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 🌹
रोजगार गायब सभी, चले लोह के यंत्र।
कारण और अनेक हैं, हुआ भ्रष्ट अब तंत्र।।१
काले-काले काम भी, दिन में करते आज।
लोग हुए बेकार अब, बेंच दिये है लाज।।२
रिश्वत में शिक्षा बिके, बिके हुए हुक्काम।
बिना दलाली मिले नहिं, मजदूरी का दाम।।३
आया समय मशीन का, बदला श्रम किरदार।
रोजगार गायब सभी, लोग हुए बेकार।।४
ए आई की धूम है, आन लगावें धान।
भूख मिटाये पेट की, नहीं वेदना ज्ञान।।५
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कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 🌹
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