भरोसा


              😄भरोसा😀
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देख दूसरों के चलन,
मैंने कदम बढ़ाया…..
कभी ठिठकता,
कभी दोंड़ता,
अपना नाम बनाने,
ऐसे काम चलाया…देख दूसरों के…
कभी नकल करने को,
ताका-झांकी करता,
अपने को श्रेष्ठ दिखाने,
खूब जतन लगाया…देख दूसरों के…
इतना तो सीख गया,
हूबहू करने भी लगा,
पता नहीं किसी ने,
शिक्षक को यह बताया…देख दूसरों के…
मेरे थे जो मित्र,
बड़े थे विचित्र,
उनके ऊपर मुझे,
शक था गहराया….देख दूसरों के…
टूट गया भरोसा,
टूट गई दोस्ती,
खुद से सब करूंगा,
खुद को समझाया…देख दूसरों के…
मेरे कान पकड़ कर,
बड़े ही प्यार से,
बहुत ही दुलार से,
उन्होंने समझाया….देख दूसरों के…
रखा खुद पर विश्वास,
और भरोसे के साथ,
किया परिश्रम खूब,
मन को लगाया…देख दूसरों के…
जहां जो भी मिलता,
पहले मैं सीखता,
तब जीवन में,
कुछ अलग कर पाया…देख दूसरों के…
बिन सोचे बिन बिचार,
देख दूसरों के चलन,
उठाना नहीं कदम,
आज समझ में आया….देख दूसरों के….
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      कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 

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