प्रार्थना

                🌹प्रार्थना🌹
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हे वागीश्वरी, हे शब्देश्वरी, हे विश्वेश्वरी माता।
हे वीणा पाणी माता, कर पुस्तक धारणी माता।। 
मैं हूँ अधम अभिमानी, मुझको तू अपना ले,
पद कमलों से लगा कर, मुझको निर्मल कर दे,
चलूं सत्मार्ग पर, ऐसा पाठ पढ़ा दे माता।
हे वीणा पाणी माता, कर पुस्तक धारणी माता..1
दुनिया में आये हैं, कुछ कर जाएं ऐसा,
ज्ञान चक्षु खोल दो,हम कुछ कर पाएं ऐसा,
हाथों को धरम ,बाणी को मधुर बना दे माता।।
हे वीणा पाणी माता कर पुस्तक धारणी माता..2
अंतः करण को मेरे, सत्कर्म दिखा दे माता,
कानों में गूंजे संतों की निर्मल वाणी माता,
संतों की निर्मल वाणी, रसना में भर दे माता।।।
हे वीणा पाणी माता कर पुस्तक धारणी माता..3
कर्म करूं कुछ ऐसा,तेरा लाल कहाऊं,
मेरी कामना पूरी हो,तेरा कर्ज चुकाऊं,
लालच न हो मन में, इतना सब दे दे माता ।।।।
हे वीणा पाणी माता, कर पुस्तक धारणी माता..4
चंचल मन है मेरा, निश्छल इसे बना दो,
मैंला पानी हूं धरा का, निर्मल नीर बहा दो,
करके कर से छाया,जलता दीप बना दे माता।।
हे वीणा पाणी माता कर पुस्तक धारणी माता..5।
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       रचना:-कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 🌹 
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