गंगा करे सवाल
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गंगा कहे पुकार सभी से, कहता बहता नीर।
युग-युग से मैं हरती आई, हर प्राणी की पीर......
माना तुमने पतित पावनी, फिर भी धोते मैल।
बांध पोटली मुझमें फेंको, बनकर रहते छैल।।
घाट-घाट पर कचरा करके, दूषित करते तीर।
गंगा करे सवाल सभी से, कौन हरेगा पीर….
युग-युग से मैं हरती आई, हर प्राणी की पीर....1
रोज सबेरे पूजा करते, खूब लगाते भोग।
नालों को तुम खूब बहाते, जिससे फैले रोग।।
मेरे जल को कौन पियेगा,कहते जिसको क्षीर।
गंगा करे सवाल सभी से, बोलो मेरे वीर….
युग-युग से मैं हरती आई, हर प्राणी की पीर....2
उनको उत्तर क्या दोगे जब, भारी पड़े अकाल।
नहीं बचेगी मेरी धारा, होंगे बहुत बवाल।।
तरसेगी जब भावी पीढ़ी, नहीं बचेगा नीर।
गंगा करे सवाल सभी से,अब तो रखलो धीर…
युग-युग से मैं हरती आई, हर प्राणी की पीर....3
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कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी
युग-युग से मैं हरती आई, हर प्राणी की पीर......
माना तुमने पतित पावनी, फिर भी धोते मैल।
बांध पोटली मुझमें फेंको, बनकर रहते छैल।।
घाट-घाट पर कचरा करके, दूषित करते तीर।
गंगा करे सवाल सभी से, कौन हरेगा पीर….
युग-युग से मैं हरती आई, हर प्राणी की पीर....1
रोज सबेरे पूजा करते, खूब लगाते भोग।
नालों को तुम खूब बहाते, जिससे फैले रोग।।
मेरे जल को कौन पियेगा,कहते जिसको क्षीर।
गंगा करे सवाल सभी से, बोलो मेरे वीर….
युग-युग से मैं हरती आई, हर प्राणी की पीर....2
उनको उत्तर क्या दोगे जब, भारी पड़े अकाल।
नहीं बचेगी मेरी धारा, होंगे बहुत बवाल।।
तरसेगी जब भावी पीढ़ी, नहीं बचेगा नीर।
गंगा करे सवाल सभी से,अब तो रखलो धीर…
युग-युग से मैं हरती आई, हर प्राणी की पीर....3
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कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी

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