बाल कविता
बाल-गीत
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सुबह सबेरे उठ करके, दातुन मंजन करता रोज।
खूब दौड़ता दण्ड लगाता,योगा भी करता मैं रोज।।
रोज नहाता कपड़े धोता,ईश वंदना करता रोज।
आसपास न रहे गंदगी,साफ सफाई करता रोज।।
भरा रहे न पानी, नाली मोरी देखा करता रोज।
मच्छर मार दवा डालता, मच्छरदानी लगाता रोज।।
नीम धुआं रात में करता,चैन से तब सो पाता रोज।
कभी बीमार नहीं मैं पड़ता, खूब पढ़ाई करता रोज।।
देखा-देखी तुम भी सीखो,करो साफ-सफाई रोज।
आसपास की करें सफाई,ऐसी कसम उठाएं रोज।।
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मौलिकः-कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी
नर्मदापुरम्
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