चुनकर भेजा अपने हित

                 🏵️चुनकर भेजा🏵️ 
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चुनकर भेजा अपने हित में, हमने ही वरदान दिया।
आप कोसते हो क्यों उसको,ऐसा क्या है काम किया।
बिगड़े काम कराने उसको, तुमने उसका चुना ठिया।
फिर कहते हो उसने हमसे,मन भरके उत्कोच लिया।
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अडिग रहो तुम सच्चाई पर,नेकी के सब काम करो।
मन में होवे बैर अगर तो,उसका तुम तो दमन करो।
तजकर भेद अपना पराया, सबसे तुम तो प्रेम करो।
कुछ दिवसों का जीवन अपना, नहीं किसी से बैर करो।
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                 कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 🌹               

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