वंदगी
वंदगी
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नहीं सुहाती दिल्लगी, हृदय बहुत कमजोर।प्रेम करे पर टूटता, जहां किया पुरजोर।।
करूं वंदगी दूर से, टूटे दिल के तार।गहरे घाव कुरेदते, और छिड़कते क्षार।।
दिल्लगी और वंदगी, अद्भुत करती मार।राम राम है दूर की, छोड़ मजाकी नार।।
**** कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी
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