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गंगा करे सवाल

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******************************* गंगा कहे पुकार सभी से, कहता बहता नीर। युग-युग से मैं हरती आई, हर प्राणी की पीर...... माना तुमने पतित पावनी, फिर भी धोते मैल। बांध पोटली मुझमें फेंको, बनकर रहते छैल।। घाट-घाट पर कचरा करके, दूषित करते तीर। गंगा करे सवाल सभी से, कौन हरेगा पीर…. युग-युग से मैं हरती आई, हर प्राणी की पीर....1 रोज सबेरे पूजा करते, खूब लगाते भोग। नालों को तुम खूब बहाते, जिससे फैले रोग।। मेरे जल को कौन पियेगा,कहते जिसको क्षीर। गंगा करे सवाल सभी से, बोलो मेरे वीर…. युग-युग से मैं हरती आई, हर प्राणी की पीर....2 उनको उत्तर क्या दोगे जब, भारी पड़े अकाल। नहीं बचेगी मेरी धारा, होंगे बहुत बवाल।। तरसेगी जब भावी पीढ़ी, नहीं बचेगा नीर। गंगा करे सवाल सभी से,अब तो रखलो धीर… युग-युग से मैं हरती आई, हर प्राणी की पीर....3 *********************************          कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी

सृष्टि का सिंगार

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सृष्टि का सिंगार  ************************************* साॅंचा ढला वदन तुम्हारा,इसको जरा संभाल। झीने अंबर में दिखता है,कंचन बदन कमाल.. कंचन बदन केश बदरा से, माॅंग दामिनी रेख।  नयन सरोवर दीपध्वज है,बनता सुरधनु पेख।। होंठ लालिमा टेसू लज्जित,झुके लाज से भाल कानों के कुंडल से दमके, कोमल दोनों गाल..1 झीने अंबर में दिखता है, कंचन बदन कमाल, साॅंचा ढला वदन तुम्हारा, इसको जरा संभाल……………. बिंदी लागे उगता सूरज, भौंहें धनुष कमान। हॅंसुली हार गले में डाले,मधुर मधुर मुस्कान।। नाक नथुनिया मोती लागे,पुष्प डली हिमखंड। बाजूबंदा कसक रहा हैं, मांसल हैं भुजदंड।। शैल शिखर उरोज तुम्हारे,पड़ी फूल की माल.2 झीने अंबर में दिखता है, कंचन बदन कमाल, साॅंचा ढला वदन तुम्हारा, इसको जरा संभाल……………. हिलें होंठ तो चमचम चमकें, मोती जैसे दांत। कपूर वरण कंठ तुम्हारा,दिखे हलक की आंत। करधोनी कटि पर लहराती,लेती ताल हिलोर। महावर बिछुआ छटा न्यारी, देते चित्त झकोर। पायल भी तो तान सुनाती, होते सब बेहाल..3 झीने अंबर में दिखता है, कंचन बदन कमाल, साॅंचा ढला वदन तुम्हारा, इसको जरा संभाल……………. रति की मूरत तेरी काया, सृष्टि का ...

प्रार्थना

                🌹प्रार्थना🌹                      **00** हे वागीश्वरी, हे शब्देश्वरी, हे विश्वेश्वरी माता। हे वीणा पाणी माता, कर पुस्तक धारणी माता।।  मैं हूँ अधम अभिमानी, मुझको तू अपना ले, पद कमलों से लगा कर, मुझको निर्मल कर दे, चलूं सत्मार्ग पर, ऐसा पाठ पढ़ा दे माता। हे वीणा पाणी माता, कर पुस्तक धारणी माता..1 दुनिया में आये हैं, कुछ कर जाएं ऐसा, ज्ञान चक्षु खोल दो,हम कुछ कर पाएं ऐसा, हाथों को धरम ,बाणी को मधुर बना दे माता।। हे वीणा पाणी माता कर पुस्तक धारणी माता..2 अंतः करण को मेरे, सत्कर्म दिखा दे माता, कानों में गूंजे संतों की निर्मल वाणी माता, संतों की निर्मल वाणी, रसना में भर दे माता।।। हे वीणा पाणी माता कर पुस्तक धारणी माता..3 कर्म करूं कुछ ऐसा,तेरा लाल कहाऊं, मेरी कामना पूरी हो,तेरा कर्ज चुकाऊं, लालच न हो मन में, इतना सब दे दे माता ।।।। हे वीणा पाणी माता, कर पुस्तक धारणी माता..4 चंचल मन है मेरा, निश्छल इसे बना दो, मैंला पानी हूं धरा का, निर्मल नीर बहा दो, करके कर से छाया,जलता दीप ...

हार कहां हमने मानी है

    हार कहां हमने मानी है ***** किनारा मिले न मिले,हार कहां हमने मानी है, सोच चले हैं जिस मंजिल पर,पा नी है पा नी ही है, कश्ती डूब भले ही जाए,गोता लगाना क्यों न पड़े      पर्वत पथ को रोकें,सन्मुख क्यों न हों जाएं खड़े, तूफान, आंधी सी घटाएं,चाहे बादल क्यों न बरस पड़े, लहरों के पार जाना है तुझको,अभी तो और रवानी है। सोच चले हैं जिस....1 पतवार भले ही छूटे, हौसला बनाए रखना तुम, हटा दो राह के रोड़ों को, आगे कदम बढ़ाना तुम, निशां बनाते कदमों से,राह बनाते जाना तुम, खून अभी तो ताजा है, और भरी हुई जवानी है। सोच चले हैं जिस पर...2 गर पाना ठान लिया तूने तो,बता दो अनल अंगारों को, मुट्ठी में है अंबर और अंजलि में अर्णव खारा को, पीछे लहरें कर कदमों के, मदहोश धराधरों को, झुकना,पर रुकना न अब,राह तुझे दिखानी है। सोच चले हैं जिस...3 शान न जाए,गुरुता की,उसका मान बढ़ाना है, है कोविद जग का तू, तुझको अब यही दिखाना है, स्व कर्म क्षेत्र में तुझको, ऐसा पाठ पढ़ाना है, कोटिल्य के अर्थशास्त्र से,सीखी सीख सिखानी है,...

हनुमत वीरा

 जय हो तुलसी दास                     •••••                      (1) जय हो तुलसी दास की,राम नाम के साथ। हनुमत वीरा संग में, लिए पताका हाथ।। लिए पताका हाथ, राम का पता बताए। चित्रकूट के धाम, राम की कथा सुनाए।। रचा काव्य महान, कहाये बड़े मनीषी। कविवर गाते नाम, पुकारें जय हो तुलसी।।                      (2) रोटी रूठी दीन से, हुआ भ्रष्ट जब तंत्र। काम सभी होने लगे,चलें लोह के यंत्र।। चलें लोह के यंत्र, सौ का एक संभाले। छोटे छोटे काम, श्रमिक किये हवाले।। होता बीच दलाल, रकम उगाहते मोटी। बहा पसीना खूब, मिले नहिं पूरी रोटी                        (3) रोटी रूठी दीन से, गुनहगार है कौन ? पाते राशन मुफ्त का, बैठे रहते मौन।। बैठे रहते मौन, सुहाती नहीं मजूरी। आलस से लाचार, अब होती नहिं हजूरी।। करते हैं जब काम, रकम हो कोई मोटी। कर्ज, माफ, बेदाम, फिर क्यों कमाएं रोटी ?     ...

सामूहिक सम्मान

        सामूहिक काम में सहयोग सभी का होता है। किसान का छोटा सा बेटा पिता को खेत में पानी देने जाता है तो कृषि में काम करने बालों में उसका योगदान होता है। उसका नाम भी शामिल होना चाहिए।       टीम के सभी सदस्यों से मिलकर जीत-हार होती है, इसमें किसी कम या ज्यादा योगदान का आधार नहीं होना चाहिए।        कौन कितना अच्छा खेला, कौन नहीं खेला ? अगर जीत मिली तो सबके प्रयास से। हार मिली तो सभी के आलस्य से।        कोई अच्छा खेला,ठीक है, कोई बुरा खेला तो भी उसने कुछ ना कुछ तो योगदान दिया होगा। अगर आपकी टीम दो पाइंट से जीतती है और किसी एक खिलाड़ी ने सबसे कम दो ही पाइंट बनाए हैं तो क्या उसने कोई योगदान नहीं किया ? क्या आप उसके दो नंबरों के बिना खेल जीत सकते हो ?      थोड़ा-थोड़ा करके ही बड़ा बनता है। बूंद-बूंद से घड़ा भरता है।         मेरा मतलब यह कि टीम के सभी सदस्यों को समान सम्मान मिलना चाहिए। किसी का मुंह देखकर या खेल देखकर नहीं। अभी कुछ खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया जा रहा है, किसी को भा...

आओ भूरा भगत चलें

                                               हम चले भूरा भगत      भूरा भगत जाना है, चलिए पहले हम भूरा भगत जी के बारे में कुछ थोड़ी सी जानकारी ले लेते हैं। आप किसी भी दिशा से आते हो आपको सतपुड़ा के घने जंगलों से होकर गुजरना होगा। पचमढ़ी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व होने के कारण यहां जंगली जानवरों की अधिकता मिलेगी। जंगल हरे-भरे, कल-कल बहते पानी के स्रोत मन को मोह लेते हैं।      संत भूरा भगत की तप स्थली, सांगाखेड़ा तहसील-तांमिया, जिला - -छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश, एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर कातिया समाज के महान संत भूरा भगत महाराज को समर्पित है। संत भूरा भगत ने तप करके शंकर भगवान के दर्शन किए और वरदान के रूप में उनकी सेवा करना मांग लिया। वे चौरा गढ़ पर शंकर जी के दर्शन करने जाने वाले भक्तों को राह दिखाते हैं। एक प्रतिमा चौरागढ़ में शंकर जी के सामने भी है। पास में बहती हुई देनवा नदी है जिसे पवित्र माना गया है। भूरा भगत का मंदिर छिंदवाड़ा जिले में और चौ...