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नर्मदांचल के मोती

नर्मदांचल के मोती साझा काव्य संग्रह वीडियो देखें👆       यह सांझा काव्य संग्रह "नर्मदांचल के मोती" का विमोचन दिनांक 07/12/2025 को किया जा चुका है। इस काव्य संग्रह में 53 कवियों की रचनाएं संकलित की गई हैं।      इटारसी//स्थानीय नर्मदांचल के मोती साहित्य समूह द्वारा ईश्वर रेस्टोरेंट, न्यास कॉलोनी, इटारसी में 07 दिसम्बर 2025 दिन-रविवार को दोपहर 01-बजे से पुस्तक लोकार्पण समारोह एवं काव्य रस वर्षा का भव्य आयोजन किया गया।*                नर्मदांचल के मोती-काव्य समूह के संयोजक रूपेंद्र गौर के अनुसार कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य सभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया जी एवं अध्यक्षता हेतु नगर पालिका परिषद, इटारसी के अध्यक्ष श्री पंकज चौरे जी उपस्थित हुए। इस अवसर पर काव्य संग्रह "करें बात पर गौर" हास्य व्यंग्य कुंडलियां संग्रह भाग -1 (रचयिता-रूपेंद्र गौर) पुस्तक पर सबलगढ, जिला-मुरैना से पधारे छंदकार श्री राजवीर सिकरवार ( भारती ) समीक्षा ने प्रस्तुत की तथा दूसरी पुस्तक "नर्मदांचल के मोती" (53-कवियों की साझा पुस्तक-संपाद...

मुरली सुनकर श्याम की

         मुरली सुनकर श्याम की *****************************                       (1) मुरली सुनकर श्याम की, करती थी मैं काम। वे तो जाकर बस गए, सखी द्वारका धाम।। सखी द्वारका धाम, बसायी सुंदर नगरी। भूले राधा प्रेम, सहेली माखन गगरी ।। विरह सताये खूब, गोपियां होतीं दुबली। मिलती सुनकर आस, बजाते मधुवन मुरली।।                         (2) मुखड़ा सखी निहारती, होते जो बृज धाम। यमुना जल पग पूजती, तर जाती यह चाम।। तर जाती यह चाम, श्याम की सुनकर मुरली। लोचन करती कैद, छवि जो हो गई धुंधली।। भूख लगे ना प्यास, सुनो तुम मेरा दुखड़ा। आ जाते घनश्याम, दिखाते सुंदर मुखड़ा।। ******************************        “कमलेश नागवंशी बनखेड़ी”🙏

बाल कविता

                  बाल-गीत ********************************** सुबह सबेरे उठ करके, दातुन मंजन करता रोज। खूब दौड़ता दण्ड लगाता,योगा भी करता मैं रोज।। रोज नहाता कपड़े धोता,ईश वंदना करता रोज। आसपास न रहे गंदगी,साफ सफाई करता रोज।। भरा रहे न पानी, नाली मोरी देखा करता रोज। मच्छर मार दवा डालता, मच्छरदानी लगाता रोज।। नीम धुआं रात में करता,चैन से तब सो पाता रोज। कभी बीमार नहीं मैं पड़ता, खूब पढ़ाई करता रोज।। देखा-देखी तुम भी सीखो,करो साफ-सफाई रोज। आसपास की करें सफाई,ऐसी कसम उठाएं रोज।। ***********************************       मौलिकः-कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी                         नर्मदापुरम् 

अंशुल राज के बप्पा

        🌷अंशुल राज के बप्पा 🌷                 **00** कित्ते सावन गेड़ी कूदी,डाड़े मुठ्ठें ठोंकी। खूब उछंगा डंडा कूदे, मूंछें खूब उमेंठी। हार न मानी एकऊ, खूब लगाये लप्पा।१। आज रिटायर हो रहे हैं,अंशुल राज के बप्पा...२ बरसाती चिंगारी छोड़ी, ढाला खूब नचाई। बने अहीर फिरत रहे,करलई खूब मिताई। शान से इनने करी नौकरी, नहीं डरायो पट्ठा।२। आज रिटायर हो रहे हैं,अंशुल राज के बप्पा...२ होरी के हुरियारे फीके, रंग लगायो चोखा। मारी टंगड़ी शूरों की, दओ न काहू मौका। आलराउंडर रहे मेंच में, खूब लगाओ ठप्पा।।३। आज रिटायर हो रहे हैं,अंशुल राज के बप्पा...२ चौदह बरस रहा हूं मैं,संगत बड़ी अनोखी। खूब बढ़ाओ खूब सिखाओ, नहीं भिन्नता देखी। बासठ में सठियाने नईहां, बहुत लगायें ठट्ठा।४। आज रिटायर हो रहे हैं,अंशुल राज के बप्पा...२                      ***00***              कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी                      ...

चुनकर भेजा अपने हित

                  🏵️चुनकर भेजा🏵️                               1 चुनकर भेजा अपने हित में, हमने ही वरदान दिया। आप कोसते हो क्यों उसको,ऐसा क्या है काम किया। बिगड़े काम कराने उसको, तुमने उसका चुना ठिया। फिर कहते हो उसने हमसे,मन भरके उत्कोच लिया।                               2 अडिग रहो तुम सच्चाई पर,नेकी के सब काम करो। मन में होवे बैर अगर तो,उसका तुम तो दमन करो। तजकर भेद अपना पराया, सबसे तुम तो प्रेम करो। कुछ दिवसों का जीवन अपना, नहीं किसी से बैर करो।                 ********000*******                         कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी 🌹               

संत भूरा भगत विनय चालीसा

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                           श्री गणेशाय नमः              संत श्री भूरा भगत महाराज चालीसा                         -000-        श्लोकः- ऊँ सर्व मंगल मांगल्ये,शिवे सर्वार्थ साधिके।                 शरण्ये त्र्यंबिके गौरी. नारायणी नमोस्तुते।।      दोहाः- समरथ गुरू में पाहिओं. शंभू गौरी गणेश।                करहु कृपा मम दास पर,भूरा भगत महेश।।                             ****चौंपाई**** दूसर  माह  शुक्ल  की  नवमीं,      लियो  अवतार   कियो सधरमी ।।१ लांझी  गांव  दिव्य  अति सुंदर,      जन्मे  नागवंश  शुभ  अवसर ।।२ जय जय  भूरा भगत गुरु देवा,  ...

वंदगी

                  वंदगी                                ****** नहीं सुहाती दिल्लगी, हृदय बहुत कमजोर। प्रेम करे पर टूटता, जहां किया पुरजोर।। करूं वंदगी दूर से, टूटे दिल के तार। गहरे घाव कुरेदते, और छिड़कते क्षार।। दिल्लगी और वंदगी, अद्भुत करती मार। राम राम है दूर की, छोड़ मजाकी नार।।                        ****             कमलेश नागवंशी-बनखेड़ी